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सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामले में झारखंड सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामले में झारखंड सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

रांची:- दुष्कर्म की शिकार महिलाओं से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने मांगी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि दुष्कर्म पीड़िताओं के बयान दर्ज कराने के लिए राज्य के सभी थानों में महिला अफसर प्रतिनियुक्त हैं या नहीं। अगर महिला अफसरों की प्रतिनियुक्ति है तो उन महिला अफसरों ने दुष्कर्म के कितने मामलों में महिलाओं का बयान दर्ज किया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में दुष्कर्म या यौनाचार से जुड़े मामलों में लागू कानून, त्वरित अनुसंधान, सजा दिलाने, मेडिको फॉरेंसिक एजेंसियों की कार्यशैली, कानूनी सलाह, ट्रॉयल, पुनर्वास व राहत के विषयों पर पूरी जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के स्टैंडिंग काउंसिल तापेश कुमार सिंह ने राज्य के मुख्य सचिव डीके तिवारी को इस संबंध में पत्र भेजा है। मुख्य सचिव ने सात दिनों के भीतर राज्य सरकार के गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, स्वास्थ्य, महिला व बाल विकास विभाग, अभियोजन निदेशालय से संबंधित पहलुओं पर रिपोर्ट मांगी है।
दुष्कर्म पीड़िता के बयान की करानी होगी वीडियोग्राफी
सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर को आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि पुलिस के लोग दुष्कर्म पीड़िताओं के बयान की वीडियोग्राफी कराएं। सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य पुलिस से पूछा है कि क्या राज्य में दुष्कर्म पीड़िताओं के बयान की वीडियोग्राफी का सरकुलर जारी हुआ है या इस संबंध में पुलिस की तरफ से कोई प्रावधान किए गए हैं। दुष्कर्म के कांडों में कई बार पीड़िताओं को मानसिक व शारीरिक विकलांगता झेलनी पड़ती है। ऐसे में पीड़िताओं के बयान दर्ज कराने के लिए राज्य के सभी जिलों में पुलिस को स्पेशल एडुकेटर या इंटरप्रेटर रखना है, जो महिला की बातों को समझ उसे पुलिस अनुसंधानक को सही तरीके से बता सके। जीरो एफआईआर जरूरी, कहीं भी दर्ज कराया जा सकता है महिला का बयान
दुष्कर्म की शिकार महिला का बयान किसी भी जगह पर दर्ज कराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि ऐसे कितने मामले दर्ज हुए हैं, जहां घटनास्थल संबंधित थाने में नहीं था, बावजूद इसके पुलिस ने बगैर केस नंबर के एफआईआर दर्ज कर मामले में कार्रवाई की। वहीं, दुष्कर्म पीड़िता थाने के अलावे अपनी पसंद की जगह या आवास पर भी पुलिस के समक्ष बयान दर्ज करा सकती है। स्थायी या अस्थायी तौर पर शारीरिक-मानसिक विकलांगता की स्थिति में पीड़िता पुलिस को अपनी पसंद की जगह पर बयान दर्ज करने के लिए बुला सकती है।

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