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सच्चर कमिटी की सिफारिशों को लागू करने की वादे को मुख्यमंत्री निभाएं।

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सच्चर कमिटी की सिफारिशों को लागू करने की वादे को मुख्यमंत्री निभाएं।

लातेहार। मुस्लिम बुद्धिजिवीयों व समाजसेवीयों की बैठक समशुल होदा की अध्यक्षता में माको डाकबंगला में संपन्न हुई,
सच्चर कमिटी की सिफारिशों को झारखंड में लागू कराने पर जोर डालने के लिए बैठक की गई है, वक्ताओं ने कहा कि आज मुसलमान इस देश में अपमान और डर के साये में जी रहे हैं, पुलिस और सरकारी महकमों में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है, सच्चर कमेटी ने मुसलमानों को हर क्षेत्र में ज्यादा तरजीह देने की सिफारिश की थी ताकि उनके रहन – सहन और सामाजिक – आर्थिक हालत में सुधार हो सके, इसके बाद तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने पंद्रह प्वाइंट प्रोग्राम की शुरूआत भी की जिसमें मुसलमानों को शिक्षा और नौकरी के लिए बेहतर अवसर मुहैया कराए जाने की रणनीति का खाका खींचा गया.

आयोग की सिफारिश थी कि केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों में अल्पसंख्यकों को पंद्रह फीसदी आरक्षण दिया जाए, शिक्षा में भी ये आरक्षण 15 फीसदी होगा और इसमें 10 फीसदी हिस्सा अकेले मुसलमानों को दिया जाए, दस साल बाद भी मुसलमानों की स्थिति में कोई ज्यादा सुधार नहीं है, वो अब भी उसी तरह के दोयम दर्जे का जीवन गुजारने को मजबूर हैं, समय बदला सरकारें बदली लेकिन ना ही केंद्र की कोई सरकार और ना ही किसी राज्य की सरकार ने सच्चर कमेटी की मांगों को पूरी तरह से लागू करने कि तत्परता दिखाई.

किसी राज्य में भी आजतक सच्चर कमिटी कि सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है, सीएम ने चुनाव के पहले कहा था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार राज्य में बनते ही सच्चर कमिटी कि सिफारिशों को लागू कर दिया जाएगा, मौजूदा राज्य की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार को इस वादे पर गहराई से सोचने और सच्चर कमेटी को लागू करने की जरूरत है, बैठक में सच्चर कमिटी को लागू करने के लिए सरकार पर जोर डालने के लिए रणनीति बनाई गई।

जिंदा जला दी गयी गुलनाज के हत्यारों को शख्त सजा दिया जाय।

भाजपा शासित राज्यों में मुस्लिम दलित आदिवासी युवतियां सुरक्षित नहीं हैं।

बिहार की वैशाली जिला का देसरी थाना के चांदपूरा ओपी के रसूलपुर हबीब गांव की जिंदा जलाई गई युवती गुलनाज हत्याकांड पर आक्रोश व्यक्त किया गया, मृतक के प्रति गहरी शोक व परिजनों के लिए संवेदना प्रकट किया गया, बिहार सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है, कहा कि 30 अक्टूबर की सुबह तीन दबंग लड़कों ने गुलनाज खातुन 20 वर्ष के साथ छेड़खानी की जिसका उसने विरोध किया, शाम को जब वह कूड़ा फेंकने बाहर निकली तब उस पर गांव के ही सतीश राय व अन्य ने किरासन तेल उड़ेल कर आग लगा दिय

जिससे वह 70% जल चुकी थी, गुलनाज का पहले स्थानीय स्तर पर इलाज शुरू हुआ फिर पटना के पीएमसीएच में 15 नंवबर को उसकी मृत्यु हो गई, इस पूरे मामले में पंद्रह दिनों तक पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, इससे साफ झलकता है कि अपराधियों के साथ पुलिस की मिलीभगत है, पुलिस को दिए बयान में गुलनाज ने अपराधियों का नाम सतीश राय व अन्य को बताया था लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं की यह शर्मनाक है कि घटना के पंद्रह दिनों बाद भी इस मामले में पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है, यह कितनी भयानक बात है कि एक लड़की को सिर्फ इसलिए जला दिया गया क्योंकि उसने छेड़खानी करने वाले लड़के का विरोध किया, नेताओं ने कहा कि जहां जहां भाजपा गठबंधन की सरकार है वहां अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, मुस्लिम दलित आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं

बैठक में चांदपुरा ओपी प्रभारी और देसरी थानाध्यक्ष को तत्काल बर्खास्त करने, सभी अभियुक्तों को तत्काल गिरफ्तार करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस का स्पीडी ट्रायल कर जल्द से जल्द शख्त सजा देने, पीड़ित परिवार को नौकरी और मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है, मौके पर समशुल होदा, हाजी फिरोज अहमद, अयुब खान, असगर खान, अबास अंसारी, अफताब आलम, अहद खान, बाबर खान, बेलाल अहमद, मनान अंसारी, लाडले खान, मुर्तजा अंसारी, अख्तर हुसैन, मो0 कलीम अंसारी, मो0 आबिद, मो0 अख्तर, सलाम अंसारी, मो0 फहिम उद्दीन, कुर्बान अंसारी, मो0 साबीर अंसारी, मो0 खुर्शीद अंसारी, अफरोज आलम, जनाब अंसारी, रसीद अंसारी सहित कई लोग शामिल थे.


लोकतांत्रिक मुस्लिम कमिटी का गठन किया गया जो इस प्रकार है, सरपरस्त हाजी फिरोज अहमद, समशुल होदा, जनाब अंसारी, सलाम अंसारी, अयुब खान, अबास अली, नुर मो0, समशेर खान, सदर मनान अंसारी, नायब सदर अफताब आलम, सिक्रेटरी असगर खान, नायब सिक्रेटरी लाडले हसन खान, खझांची अहद खान का चयन किया गया।

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