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संताल सरना महाधर्म सम्मेलन : लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में तैयारियां पूरी, देश-विदेश से जुटेंगें लाखों संताली

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संताल सरना महाधर्म सम्मेलन : लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में तैयारियां पूरी, देश-विदेश से जुटेंगें लाखों संताली

बोकारो : लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में 19वें अंतर्राष्ट्रीय संताल सरना महाधर्म सम्मेलन (राजकीय महोत्सव) की सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. आयोजन समिति ने अपने स्तर से पुख्ता तैयारी की है. सम्मेलन स्थल (दरबार चट्टानी) में बेहद भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया है. बगल में दो जगहों पर श्रद्धालुओं के विश्राम करने के लिए भी बड़े-बड़े टेंट लगाये गये हैं. मंच को भी बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया गया है. 

आकर्षक विद्युत साज-सज्जा की गयी है. श्रद्धालुओं की सुविधा को सात एलइडी स्क्रीन्स जगह-जगह लगाये गये हैं. निगरानी को 40 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. चार ड्रोन से भी सम्मेलन की निगरानी होगी. इस बार आयोजन की मुख्य अतिथि सूबे की गवर्नर द्रौपदी मुर्मू होंगी. 

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम 

लुगुबुरु मार्ग में श्रद्धालुओं के लाखों की संख्या में आवागमन को देखते हुए सौ सोलर लाइट दुरुस्त किया गया है. पेयजल को कई नल के पॉइंट्स और उसके बाद जगह-जगह हजारों जार के माध्यम से पानी उपलब्ध करायी जायेगी. कई हेल्प डेस्क व कई सुव्यवस्थित मेडिकल कैंप लगाये गये हैं. जगह-जगह शौचालय का निर्माण कराया गया है. आपात स्थिति को पर्याप्त संख्या में एंबुलेन्स व फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को तैनात रखने पर बल दिया गया है. 

टीटीपीएस, ओएनजीसी, ओरिका, सीसीएल भी व्यवस्थाओं के बाबत भागीदारी निभा रहे हैं. टीटीपीएस प्रबंधन ने श्यामली गेस्ट हाऊस को बेहद सुंदर तरीके से सजाया है. रंग-रोगन कराया गया है. बता दें कि इस बार का आयोजन चुनाव आचार संहिता के दायरे में हो रहा है.  

सम्मेलन के दौरान लगने वाले मेले में करीब 100 होटेल्स, 400 फल-प्रसाद, पारंपरिक व आधुनिक वस्त्र, किताबें, बर्तन, आयुर्वेदिक व अन्य स्टॉल्स, 85 मिठाई दुकान सहित फुटपाथ दुकानें शामिल हैं. इस मेला की एक खास विशेषता यह है कि यहां विभिन्न संताल बहुल राज्यों की संस्कृति से जुड़ी साहित्य व धार्मिक किताबें तथा पारंपरिक वस्त्रों-हथियारों व संगीत के साजो-समान के स्टॉल्स चार-चांद लगा देते हैं.

इन चीजों पर पूर्ण प्रतिबंध

दो दिवसीय संताली धार्मिक सम्मेलन को लेकर मांस-मदिरा की बिक्री व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है. स्टॉल्स में फोम प्लेट्स व फिलामेंट बल्ब लगाने पर प्रतिबंध है. दुकानदारों को एलइडी बल्ब व पत्तों के पत्तल का उपयोग करना है. हर दुकान में एक डस्टबिन रखना अनिवार्य है.

सम्मेलन में आधुनिकता का भी असर

सम्मेलन में आगंतुक संताली श्रद्धालुओं का हाव-भाव बेहद खास होता है. कोई साधारण तरीके से तो कोई आधुनिक वेश-भूषा में पहुंचते हैं. आधुनिक वेश-भूषा में सर्वाधिक युवा पीढ़ी के श्रद्धालु शामिल होते हैं. हालांकि, वे भी ड्रेस कोड का बखूबी ध्यान देते हैं. पारंपरिक वस्त्र पहनें इन युवाओं की पीठ में बड़े-बड़े कैरी बैग व आंखों में बड़े-बड़े गॉगल्स और हाथों में स्मार्ट फोन्स, कान में इयर फोन्स उन्हें स्टाइलिश बनाते हैं. यहां देश भर के संताली युवाओं का अनुशासित रूप से अलग-अलग अंदाज देखने को मिलता है. 

भाषा, धर्म और संस्कृति को मूल रूप में संजोये रखने पर बल 

लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में कार्तिक पूर्णिमा की चांदनी रात में लाखों संताली अपनी धर्म, भाषा व संस्कृति को प्राचीन काल से चली आ रही मूलरूप में संजोये रखने पर चर्चा करते हैं. विभिन्न परगनाओं से पधारे धर्मगुरु संतालियों को यह बताते हैं कि वे प्रकृति के उपासक हैं और लाखों-करोड़ों वर्षों से प्रकृति पर ही उनका संविधान आधारित है. प्रकृति व संताली एक-दूसरे के पूरक हैं. प्रकृति के बीच ही उनका जन्म हुआ, भाषा बनी और हमारा धर्म ही प्रकृति पर आधारित है. ऐसे में हमें अपने मूल निवास स्थान प्रकृति की सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहना होगा. तभी हमारा मूल संविधान भी बचा रहेगा और आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में हम अपने अस्तित्व के साथ जुड़े भी रह पायेंगे. 

जब देश-विदेश से जुटे लाखों लोग एक साथ यहां अपने धर्मगुरुओं की बातों पर अमल करने का प्रण लेते हैं तो संतालियों की सामूहिकता में जीने की परंपरा और मजबूत होती है. जिससे इस सम्मेलन की महत्ता खास हो जाती है. खास इसलिए भी कि आज जब विश्व पर्यावरण संकट से निजात पाने को गहरी चिंता में डूबा हुआ है तो संताली समुदाय हजारों-लाखों सालों से प्रकृति की उपासना कर यह भी बताता है कि उनके समस्त परम्पराओं में विश्व शांति का मंत्र निहित है. 

जाहेरगढ़ (सरना स्थल) संतालियों का उपासना केंद्र

संतालियों की अपने आराध्यों की उपासना का प्रमुख धार्मिक स्थानों में जाहेरगढ़ होता है. जहां सखुआ के

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