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संघर्ष और हिम्मत की सच्ची दास्तां है डॉ कोरनेलियुस मिंज की जिंदगी

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संघर्ष और हिम्मत की सच्ची दास्तां है डॉ कोरनेलियुस मिंज की जिंदगी

रांची विश्वविद्यालय के 34 में दीक्षांत समारोह में मिली पीएचडी की उपाधि

गोस्सनर कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं

संघर्ष को मुकाम मिल ही जाता है। संघर्ष की एक लंबी दास्तां लिखने
वाले डॉक्टर कोरनेलियुस मिंज के जीवन की भी एक अलग कहानी है। गुमला जिले के सुदूरवर्ती गांव चैनपुर अनुमंडल अंतर्गत नतापोल गांव की पगडंडियों से निकलकर शहर तक का सफर तय कर अपने सपनों को उड़ान दिया। 1 मार्च 2021 को रांची विश्वविद्यालय के 34 वें दीक्षांत समारोह में उन्हें पीएचडी की उपाधि दी गई। यह उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। निरक्षर परिवार से संबंध रखने वाले डॉ मिंज ने उच्च शिक्षा को हासिल कर लोगों के लिए मार्गदर्शन का काम भी किया है। उन्हें न सिर्फ या उपाधि मिली है लेकिन वे गोस्सनर कॉलेज रांची में नागपुरी के सहायक प्राध्यापक पद पर योगदान दे रहे हैं। इन्हें कभी दो वक्त की रोटी भी खाने को नहीं मिलती थी, लेकिन कभी विचलित नहीं हुए। कुली और मुर्गा मीट काटने का काम करते हुए भी पढ़ाई को जारी रखा। घर में आर्थिक संकट हमेशा बना रहता था। उनकी मां की निधन के बाद परिवार पूरी तरह से बिखर गया। लंबे समय तक के लिए घर गांव छूट गया, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। इसी हिम्मत और संघर्ष का परिणाम है कि आज वे एक प्रोफेसर के पद पर हैं और उन्हें पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त हुई । हमेशा ऊंचा ख्वाब देखने वाले डॉक्टर मिंज से युवाओं को भी प्रेरणा लेने की जरूरत है जो थोड़े से संकट और परेशानी में हिम्मत नहीं है हार जाते हैं इनके जीवन में ना सिर्फ आर्थिक संकट आए लेकिन परिवार में भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

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