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वोटकटवा या गेम चेंजरः कई छोटे दलों के अस्तित्व का सवाल, कांग्रेस, वी.आई.पी, हम और वाम को दिखाना होगा दमखम

पॉलिटिकल न्यूज़

वोटकटवा या गेम चेंजरः कई छोटे दलों के अस्तित्व का सवाल, कांग्रेस, वी.आई.पी, हम और वाम को दिखाना होगा दमखम

वोटकटवा, गेम चेंजर या फिर किंग मेकर, यह सवाल सियासी गलियारे में छोटे दलों को ले कर पूछा जा रहा है, जो राजग या विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। जाहिर तौर पर मोर्चा बना कर चुनाव मैदान में उतरे जाप, आरएलएसपी, एसजेडी व लोजपा जैसे दलों के लिए यह चुनाव अस्तित्व का सवाल बन गया है। ये दल इस बार चूके तो कहीं के नहीं रहेंगे।

निगाहें उन दलों पर भी है जो मुख्य प्रतिद्वंद्वी माने जा रहे राजग और महागठबंधन का हिस्सा हैं। मसलन राजग के साथ चुनाव लड़ रही वीआईपी और हम को अपनी भविष्य की राजनीति बचाए रखने के लिए अपना दमखम दिखाना होगा। महागठबंधन से जुड़ी कांग्रेस और वाम दलों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो ये सभी गठबंधन की राजनीति के लिए एकाएक अप्रासांगिक बन जाएंगे।
धारणा तोड़ना पहली बड़ी चुनौती
राजग और महागठबंधन से इतर चुनाव लड़ रहे दलों के लिए सबसे पहली चुनौती धारणा विशेष को तोड़ने की है। राज्य में आम धारणा है कि मुकाबला बस राजग और महागठबंधन के बीच है। अगर यही धारणा बनी रही तो जाप, एमआईएमआईएम, एसजेडी, रालोसपा, लोजपा के लिए बेहतर प्रदर्शन के दरवाजे बंद हो जाएंगे। बीते विधानसभा चुनाव में इनमें से कई दल इस आशय की धारणा बनने की कीमत चुका चुके हैं। मसलन तब जाप, एआईएमआईएम, एसजेडी जैसे दल खाता खोलने से चूक गए थे। जाप को महज 1.4 फीसदी, एसजेडी और एआईएमआईएम को महज 0.2 फीसदी मत ही मिले थे।

मुश्किल में रालोसपा और लोजपा


रालोसपा का इस बार बसपा, एआईएमआईएम के साथ गठबंधन है। अंत समय में पार्टी महागठबंधन और राजग में जगह बनाने में नाकाम रही। अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरी लोजपा का भी अंत समय में राजग का साथ छूटा। कभी राजग तो कभी महागठबंधन के साथ रहे रालोसपा के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा के लिए यह चुनाव करो या मरो वाला है। इस बार कमजोर प्रदर्शन के बाद पार्टी को अस्त्वि की लड़ाई लड़नी होगी। यही स्थिति लोजपा की है। कमजोर प्रदर्शन से पार्टी में विरासत की जंग छिड़ेगी। पार्टी को केंद्र में भी राजग से बाहर किया जा सकता है।

सहयोगियों की भी बढ़ी चुनौती


इस चुनाव में वीआईपी और हम राजग तो वाम दल और कांग्रेस राजद की अगुआई वाले महागठंधन में हैं। वीआईपी और हम ने अगर राजग की नैया पार लगाने में अहम भूमिका अदा नहीं की तो इनकी सियासत की भविष्य की राह रपटीली हो जाएगी। बीते विधानसभा हम कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई थी। इसी तरह कांग्रेस और वाम दल राजद से अधिक सीटें हासिल करने में कामयाब तो हो गई है। हालांकि अगर इन दलों का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा तो भविष्य में इन्हें गठबंधन में शामिल करने के मामले में बड़े दल दिलचस्पी नहीं लेंगे।

क्यों निशाने पर हैं ‘वोटकटवा’ दल


चुनाव में राजग के निशाने पर लोजपा तो महागठबंधन के निशाने पर जाप और एमआईएमआईएम की अगुवाई में बना मोर्चा है। राजग लोजपा को तो राजद ओवैसी, कुशवाहा और पप्पू यादव को वोटकटवा के रूप में प्रचारित कर रहा है। जाहिर तौर पर भाजपा को लोजपा के कारण अपने वोट बैंक में सेंध लगने का डर है तो राजद को ओवैसी, कुशवाहा और पप्पू यादव से। इसलिए राजग और महागठबंधन अलग-अलग दलों के संबंध में वोटकटवा की धारणा बना रहा है।

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