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मज़दूर दिवस के मौके पर फरजाना फारूकी ने दिहाड़ी मजदूरों और घरेलू कामगारों की समस्याओं पर चर्चा की…

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मज़दूर दिवस के मौके पर फरजाना फारूकी ने दिहाड़ी मजदूरों और घरेलू कामगारों की समस्याओं पर चर्चा की…

राँची : अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में आज भाकपा के रांची जिला कोषाध्यक्ष फरजाना फारूकी के नेतृत्व में दिहाड़ी मजदूरों और घरेलू कामगारों की समस्याओं पर चर्चा हुई। यह चर्चा कांटाटोली स्थित एक्सआइएसएस कम्पाउंड में आयोजित की गयी थी। इस चर्चा के दौरान कोविड-19 के कारण लगाये गये लाॅकडाउन के नियमों का सख्ती से अनुपालन किया गया। चर्चा के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि असंगठित मजदूरों के निबंधन के लिए संयुक्त प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर भाकपा के रांची जिला सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस सिर्फ छुट्टी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आंदोलन और संघर्ष की बदौलत अधिकार प्राप्त होने की गारंटी भी देता है। उन्होंने शिकागो के शहीदों को याद करते हुए कहा कि इन्हीं के संघर्ष और कुर्बानियों के चलते आज मजदूरों को काम के घंटा निर्धारित किया गया है। उनका कहना था कि आज फिर से मजदूरों के सामने अपने संघर्ष को तेज करने और प्राप्त अधिकारों को फिर से वापस लेने का समय आ गया है।

झारखंड राज्य परिषद् सदस्य उमेश नजीर ने कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की संख्या आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में बढ़ी है। ये वही लोग हैं, जिन्हें मजदूरों के संघर्ष से प्राप्त अधिकारों को देने में मालिक और सरकार आनकानी करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद हुए लाॅकडाउन के दौरान उनकी बदहाली ने सरकार की उपेक्षा को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज मजदूरों की एकजूटता को तोड़ने के लिए सरकार और मालिक धर्म, जाति, नस्ल की हवा देते हैं, ताकि मजदूर अपनी असली ताकत को नहीं पहचान सकें।

एआइएसएफ के झारखण्ड राज्य अध्यक्ष मेहुल मृगेंद्र ने मजदूरों की हर लड़ाई में साथ देने का आश्वासन दिया और कहा कि मजदूरों की मेहनत से ही दुनिया का हर इमारत चकाचौंध है। फिर भी उनकी स्थिति दयनीय बना दी गयी है। उनके मेहनत की चोरी की बदौलत ही पूंजीपतियों की ताकत बढ़ती है। इसलिए मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा।
इस अवसर पर दिहाड़ी मजदूर शेख रमजान, सज्जाद, मुबारक अंसारी, घरेलु कामगार लवली देवी, काजल देवी, नजबुन निसा समेत कई लोगों ने अपनी समस्याओं को रखा। अंत में फरजाना फारूकी ने समान काम के बदले समान मजदूरी के लिए संघर्ष को तेज करने पर जोर दिया।

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