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बिरसा मुण्डा जयन्ती को आदिवासी युवा दिवस के रूप में मनाया जाये

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बिरसा मुण्डा जयन्ती को आदिवासी युवा दिवस के रूप में मनाया जाये

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में पालघर के नानिवली में चल रहे आदिवासी एकता परिषद के आदिवासी सांस्कृतिक एकता सम्मेलन में चाईबासा से अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के उपाध्यक्ष भी शिरकत करने पहुंचे। सम्मेलन में मुकेश बिरुवा ने देश के आदिवासियों को सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे इतिहास को जानबूझकर छुपाया गया। उसे दोबारा लिखने की आज आवश्यकता है। बिरसा मुंडा आदिवासियों के प्रेरणा स्त्रोत हैं। उनकी छोटी सी जिंदगी हम आदिवासियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एकजुट करने की प्रेरणा देती है। मैं आज आपके सामने यह प्रस्ताव रखता हूं कि युवा अवस्था में आदिवासियों के लिए, जल, जंगल और जमीन के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले बिरसा मुंडा का जन्मदिन 15 नवंबर को आदिवासी युवा दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए ताकि हमारी युवा पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा सकें। हम आदिवासी मध्य भारत में रहते हैं, प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण हम सरकार और पूंजीपतियों के निशाने पर लगातार रहे हैं जबकि ये क्षेत्र संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के अंतर्गत आता है। विकास हम अदिवासियों के विरुद्ध एक युद्ध है, जो हम आदिवासियों के खिलाफ लड़ा जा रहा है, हमें अपनी भाषा, संस्कृति और जल जंगल और जमीन के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। आज जरूरत है इसकी सुरक्षा के मद्देनजर मध्य भारत के इन पांचवीं और छठी अनुसूची क्षेत्रों को हम आदिवासी कॉरिडोर घोषित कर दें। सभी सरकारों ने हमारे आदिवासी क्षेत्रों को नुकसान ही पहुंचाया है, ऐसे में आदिवासी कॉरिडोर होने से हमारे अस्तित्व को बचाया जा सकेगा। इस सम्मेलन को आदिवासी एकता परिषद के अध्यक्ष भूपेन भाई चौधरी, राजू पंडरा और डॉ सुनील पराड़ के नेतृत्व में सम्पन्न किया गया। इस आयोजन में देश एवं विदेश के आदिवासी भी शामिल हुए।

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