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निर्दलीय उमीदवार प्लासिदियूस टोप्पो ने कहा गुमला विधानसभा की जनता विस्थापन के खिलाफ करेगी जनता वोट

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निर्दलीय उमीदवार प्लासिदियूस टोप्पो ने कहा गुमला विधानसभा की जनता विस्थापन के खिलाफ करेगी जनता वोट

गुमला:–गुमला विधानसभा की जनता नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम, पलामू व्याघ्र परियोजना एवं वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से होने वाले विस्थापन के खिलाफ अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। केन्दीय जन संघर्ष समिति के समर्थित एवं निर्दलीय उमीदवार प्लासिदियूस टोप्पो ने क्षेत्र भृमण कर प्रेस रिलीज जारी कर उक्त बातें कही।
पिछले 27 सालों में जनता चुनाव के समय राजनीतिक दलों को इस विश्वास के साथ वोट करती आई कि वे जनता के मुद्दों पर पहल करें और उन्हें राहत पहुंचाए, परन्तु आज तक जनता की भावनाओं एवं विश्वास के साथ धोखा हुआ है. अब जनता अपना प्रतिनिधि भेज कर अपनी बात कहवाना चाहती है जहाँ नीति व नियम बनाये जाते हैं.
जैसा की आपको मालूम है कि नेतरहाट फ़ील्ड फायरिंग रेंजसे 245 गाँव, टूडरमा डैम से55, पलामू व्याघ्र परियोजना 168 गाँव जिसमें से 8 गाँव को विभाग द्वारा गाँव खाली करने के लिए सहमती एवं असहमति की चिट्ठी भी भेज चुकी है. वाइल्ड लाइफ कोरीडोर के नाम पर विभाग 6 कोरीडोर बनाने का प्रस्ताव बना चुकी है जिससे 770 गाँव प्रभावित होंगे.
श्री प्लासिदियूस टोप्पो ने कहा कि भाजपा को हराना हमारी पहली प्राथमिकता है। साथ ही हमें वोट बैंक समझने वाले लोगों को सबक सिखाना हमारी दूसरी प्राथमिकता है।
आज भी हम जनता की निम्न मांगो पर प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं।
• भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून 2018 (झारखंड) व लैंड बैंक नीति को रद्द किया जाए। भूमि कानूनों में किसी प्रकार के जन व ग्राम सभा विरोधी संशोधन न किए जाए। इन नीतियों के तहत ली गयी अथवा चिन्हित की गयी ज़मीन को तुरंत ज़मीन मालिक / ग्रामसभा को लौटाई जाए।
• नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के लिए 1999 जारी अधिसूचना को अविलम्ब रद्द हो.
• टूडमा डैम, पलामू व्याघ्र परियोजना, वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से सम्भावित विस्थापन पर रोक .
• मंडल डैम एवं ऐसी सभी परियोजनाओं को रद्द किया जाए जो ग्राम सभा की सहमती के बिना एवं भूमि कानूनों का उलंघन कर स्थापित किए जा रहे हैं।
• मंडल डेम के नाम पर लाखों पेड़ों की कटाई पर रोक.
• समता जजमेंट,पाँचवीं अनुसूची के प्रावधान और पेसा कानून को पूर्ण रूप से लागू किया जाए व नियमावली बनायी जाई। ग्रामसभा की शक्तियों और भूमिकाओं पर अतिक्रमण करने वाले सारी समितियों ,क्लबों एवं प्रशासनिक आदेशों को रद्द किया जाय।
• वनाधिकार कानून को पूर्ण रूप से लागू किया जाए और निजी व सामुदायिक पट्टों के सभी दावों को स्वीकार किया जाए।
• सारी असामयिक मौतों (भूख, कुपोषण आदि से) तथा हत्याओं (लिंचिंग, हिरासती, मुठभेड़ आदि में) की न्यायिक जांच हो, एक साल में इनकी जिम्मेवारी निर्धारित की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
• राज्य की वर्तमान स्थानीयता नीति रद्द की जाए एवं झारखंड में जिनका मूल गाँव है, केवल ऐसे लोगों को बुनियादी स्थानीय मानने की नीति बनाई जाए।हर स्तर की निजी और सरकारी नौकरियों में नेतृत्व व निर्णायक पदों पर स्थानीय लोगों की अधिकांश भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाया जाए।
• सभी जन कल्याणकारी योजनाओं एवं सरकारी सुविधाओं में आधार कार्ड की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
• शिक्षा के अधिकार का दायरा बढ़ाया जाए और सभी बच्चों के लिए 12वीं कक्षा तक की शिक्षा समान तथा निःशुल्क की जाए। विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो। विद्यालयों के विलय के फैसले को वापस लिया जाए और बंद विद्यालयों को फिर से शुरू किया जाए।निजी विद्यालयों और कालेजों की फीस पर नियंत्रण की कारगर व्यवस्था बनायीं जाए ।
• झारखंड धर्म स्वातंत्र्य कानून को रद्द किया जाए.
• सरना या अन्य किसी नाम के स्वतंत्र आदिवासी धर्म को मान्यता दी जाए।
• झारखंड की अपनी आदिवासी एवं आंचलिक भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा एवं सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का अतिरिक्त माध्यम बनाया जाए।
• सच्चर कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के चहुमुखी विकास के लिए विशेष नीति बनायी जाए । साथ ही, अल्पसंख्यक समुदाय के लिए अलग बजट का प्रावधान हो।

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