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तीसरे चरण में रामगढ़, हजारीबाग और रांची विधानसभा क्षेत्र में होगा बूथ एप्प का इस्तेमाल

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तीसरे चरण में रामगढ़, हजारीबाग और रांची विधानसभा क्षेत्र में होगा बूथ एप्प का इस्तेमाल

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लांच किए गए बूथ एप्प का झारखंड विधानसभा चुनाव से पहली बार शुरु हुआ है इस्तेमाल

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावों में ज्यादा से ज्यादा इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने पर जोर रहा है. इस सिलसिले में बूथ एप्प लांच किया गया है. श्री विनय कुमार चौबे, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि झारखंड विधानसभा चुनाव से पहली बार पूरे देश में बूथ एप्प के इस्तेमाल की शुरुआत हुई है. यहां प्रायोगिक तौर पर 81 विधानसभा सीटों में से 10 में बूथ एप्प का उपयोग किया जाना है. इसी के अंतर्गत तीसरे चरण में रामगढ़, हजारीबाग और रांची विधानसभा क्षेत्र में बूथ एप्प का इस्तेमाल होने जा रहा है. इससे पहले दूसरे चरण में जमशेदपुर पूर्व, जमशेदपुर पश्चिम और चाईबासा में बूथ एप्प का इस्तेमाल हो चुका है. इसके अलावा देवघर (एससी), गांडेय, बोकारो औऱ झरिया विधानसभा क्षेत्र में भी बूथ एप्प का उपयोग किया जाना है. उन्होंने बताया कि इसका इस्तेमाल भी काफी सरल और सुविधाजनक है.

मतदाताओं को मिलेगा क्यू टोकन नंबर (क्यू. टी.एन.)

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि मतदाताओं को क्यू आर कोड युक्त फोटो वोटर्स स्लिप वितरित किए जाएंगे. मतदाता जब इस वोटर्स स्लिप के साथ मतदान केंद्र पर मताधिकार के इस्तेमाल के लिए आएंगे, तब वहां पर बीएलओ के द्वारा फोटो वोटर्स स्लिप के क्यू आर कोड का स्कैन किया जाएगा. इससे मतदाता से संबंधित जानकारियां प्राप्त हो जाएगी एवं उन्हें एक क्यू टोकन नंबर (क्यू. टी.एन.) उपलब्ध करा दिया जाएगा. मतदाता इसी क्यू. टी.एन. के अनुसार अपनी बारी आने पर सुगमतापूर्वक मतदान कर सकेंगे. ज्ञात हो कि कोई भी मतदाता वोटर्स हेल्पलाइन एप्प से भी फोटो वोटर्स स्लिप डाउनलोड कर सकता है.

बूथ एप्प के हैं कई फायदे

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि मतदान के दिन मतदान केंद्रों में मतदान प्रतिशत की जानकारी इस एप्प के जरिए रियल टाइम में मिल जाएगी. इससे यह भी आसानी से पता चल जाएगा कि कितने पुरुष औऱ कितनी महिला मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया है. इसके साथ बूथ एप्प से मतदान केंद्रों में मतदाताओं की पहचान आसानी से की जा सकेगी और इस एप्प के से मतदानकर्मियों को मतदान से जुड़े कार्यों को संपादित करने में काफी सहूलियत होगी. इसके जरिए प्रतिवेदन को रियल टाइम में भेजा जा सकता है, वहीं पीठासीन पदाधिकारी द्वारा भी डायरी ऑनलाइन अपलोड किया जा सकता है.

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