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झारखंड राज्य किसान सभा ने किसान सम्मान दिवस पर दिया धरना।

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झारखंड राज्य किसान सभा ने किसान सम्मान दिवस पर दिया धरना।

चंदवा – अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति एवं झारखंड राज्य किसान समन्वय संघर्ष समिति के देशब्यापी अह्वान पर झारखंड राज्य किसान सभा लातेहार इकाई ने कामता स्थित घर के दरवाजे पर लॉकडाउन सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए राष्ट्रीय तिरंगा झंडा, लाल झंडा, कृषि यंत्र कोड़ी कुदाल के साथ मांगों से संबंधित पोस्टर लेकर किसान सम्मान दिवस पर धरना दिया, खेतों में अनाज सब्जी का उत्पादन कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में साथ देने वाले अन्नदाता किसानों का मान सम्मान बढ़ाया हौसला अफजाई की, इसका नेतृत्व झाराकिसभा के जिला अध्यक्ष अयुब खान कर रहे थे, इसके पूर्व कर्ज के बोझ से दबकर तथा अकाल सुखाड़ में फसल न होने एवं अन्य कारणों से परेशान होकर जान देने वाले किसानों तथा लॉकडाउन के बीच जान गवांने वाले प्रवासी श्रमिकों के प्रति एक मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजली दी गई, किसान को सम्मान दो, किसानों की मान दो, प्रवासी मजदूरों की मद का एक हजार करोड़ रुपए को श्रमिकों को घर पहुंचाने में मदद करो, किसानों प्रवासी मजदूरों दुकानदारों को बैंक कर्ज नहीं नगद उनके खाते में राशि ट्रांसफर करो आदि नारे लगाए, अयुब खान ने किसान दिवस पर आयोजित धरना को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी अपनी जान की परवाह किए बिना किसान खेती किसानी कर रहे हैं, खेतों से बजारों तक सब्जी पहुंचाने में लगे हुए हैं, खेतों में अनाज सब्जी उगाकर लोगों की पूर्ती कर रहे हैं, संसाधन पैसा और शिचाई के अभाव के बावजूद भी किसान खेतों में जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं, इसी का नतीजा है कि इस वैश्विक महामारी के बीच भी हमे अनाज और सब्जी की कमी नहीं हो रही है, किसानों के कारण खाद्यान्न से देश का भंडार भरा पड़ा है, इस आपदा के समय में भी किसान कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रहे हैं, इसी लिए किसान मान और सम्मान के हकदार हैं, आगे कहा कि विकास का रास्ता गांव से होकर निकलता है, किसान खुशहाल होगा तो हमारा समाज भी खुशहाल होगा, किसानों के उत्थान से ही देश का चहुंमुखी विकास होगा, किसानों के कल्याण से जुड़े योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाए जाने की जरूरत है, कोरोना दौर में भी किसान फसल अनाज उगाकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, दुसरी तरफ जिस तरीके से लगातार प्रवासी मजदूर सड़कों पर भूखे प्यासे पैदल चल रहे हैं इससे ऐसा लगता है कि केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार को नागरिकों की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है, पैकेज का लाभ फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा है, मजदूरों को घर आने के लिए इतना परेशानी हो रही है कि उन्हें केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज जले पर नमक छिड़कने जैसा लग रहा है, अजादी के बाद सड़क पर मजदूरों की ऐसी दुर्दशा पहली बार देखा जा रहा है, उनकी परेशानी देखकर हर कोई का कलेजा पिघल जा रही है, लेकिन केंद्र सरकार पैदल चल रहे श्रमिकों को घर भेजने के मामले में बेपरवाह बनी हुई है, शहर में करीब सत्तर और ग्रामीण क्षेत्र में पचास प्रतिशत लोग रोजगार खो चुके हैं, मध्यम वर्ग भुखमरी के कगार पर है, सरकार को इनकी समस्याएं नहीं दिख रही है, धरना में किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाकर अठारह हजार रुपये वार्शिक करने, प्रवासी मजदूरों की मद का एक हजार करोड़ रुपए को श्रमिकों को घर पहुंचाने में खर्च करने, किसानों प्रवासी मजदूरों दुकानदारों को बैंक का कर्ज नहीं नगद उनके खाते में राशि ट्रांसफर करने, सभी शहरी और ग्रामीण परिवारों को लॉकडाउन के द्वरान हुए रोजी रोटी और आजिवीका के नुकसान की भरपाई के लिए प्रतिमाह दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता करने, प्रवासी मजदूर सरकारी सहायता के बिना अपने घरों में पहूंच चुके हैं उन्हें प्रति व्यक्ति पॉच हजार रूपये विषेश प्रवास राहत राशि एवं काम देने, डिजल की किमत में 22 रूपये प्रति लीटर की कमी करने, किसानों तथा आम जनता की सभी प्रकार के बैंकों का कर्ज एवं बिजली बिल माफ करने, किसानों को खेती के संयंत्र, खाद्य बिज मुफ्त उपलब्ध कराने आदि मांगे केंद्र सरकार से कि गई है, मौके पर किसान जीतन गंझु, परवेज खान, फहमीदा बीवी शामिल थे।

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