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झारखंड राज्य किसान सभा ने मनरेगा कार्य स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया सभा की

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झारखंड राज्य किसान सभा ने मनरेगा कार्य स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया सभा की

चंदवा। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के देशब्यापी कार्यक्रम के तहत युनियन के समर्थन में झारखंड राज्य किसान सभा ने लॉकडाउन सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए कामता पंचायत मे चल रहे मनरेगा के कार्य स्थल पर प्रदर्शन किया सभा की, यह आंदोलन खेत मजदूरों, गरीब जनता और प्रवासी मजदूरों की मांगों को लेकर आयोजित हुआ,
झारखंड राज्य किसान सभा के लातेहार जिला अध्यक्ष अयुब खान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार का आत्मनिर्भर का नारा लोगों को भ्रमित करने वाला है, जनता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोदी सरकार ने जो पैकेज की घोषणा की है उसका फायदा किसानों श्रमिकों दुकानदारों और आम जनता को नहीं मिल रहा है, सरकार जब रोजगार नहीं दे पाती है तो नौजवानों से कहते हैं कि रोजगार मांगने वाला नहीं रोजगार देने वाला बनो, इसी तरह स्टार्टअप का शुरूआत किया, स्टार्टअप, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और मेक इन इण्डिया का नारे का किया हस्र हुआ सभी जानते हैं, ऐसा ही हस्र आत्मनिर्भर के नारे का होने वाला है, सरकार जब विफल हो जाती है तो अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए हमेशा नए नए नारे गढती रही है, देश भर में कोविड-19 का रोकथाम में विफल होने, प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी कराने मे नाकाम रहने, बढ़ती बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था की नाकामी छुपाने के लिए अब मोदी सरकार ने एक नया नारा आत्मनिर्भर का दिया है, यह नारा भी छलावा साबित होगा, प्रदर्शन के माध्यम से आयकर के दायरे में न आने वाले सभी परिवारों को तीन महीनो के लिए 7500 रुपये देने, सभी प्रवासी मजदूरों को विशेष सहायता करने, दुर्घटनाओं या भूख के कारण घायल हुए या मारे गए और आत्महत्या करने वाले प्रवासी मजदूरों के परिवारों को मुआवजा, मनरेगा के तहत प्रत्येक परिवार को न्यूनतम 200 दिनों का काम इस काम की 600 रुपये या राज्य में घोषित न्यूनतम मजदूरी (जो अधिक हो) दिए जाने,मनरेगा के लिए अतिरिक्त एक लाख करोड़ रुपये आबंटन करने, राशन कार्डों अनिवार्यता के बिना सभी परिवारों को 6 महीने के लिए 10 किलोग्राम चावल / गेहूं और अन्य आवश्यक वस्तुओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मुफ्त में उपलब्ध करवाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करते हुए देश के सभी ( विशेषतौर पर ग्रामीण ) नागरिकों की स्वास्थ्य जांच की उचित व्यवस्था, श्रम कानूनों को कमजोर करने के सभी कदमों पर रोक, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के विनिवेश और विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई के निवेश को तत्काल प्रभाव से रोके जाने, किसान विराधी मॉडल कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट, 2018, मॉडल टेनेंसी एक्ट या एग्रीकल्चर लैंड लीजिंग एक्ट लागू करने के सभी प्रयासों पर रोक लगाने, कॉरपोरेट्स द्वारा छीनी जा रही किसानो की भूमि को बचाया जाए और भूमिहीनों और खेत मजदूरों में सरकारी भूमि वितरित किए जाने की मांग की गई है, प्रदर्शन मे सनिका मुंडा, बुधराम बारला, एतवा मुंडा शामिल थे।

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