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झारखंड में आदिवासी अब ‘देशद्रोही’ नहीं कहलायेगा

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झारखंड में आदिवासी अब ‘देशद्रोही’ नहीं कहलायेगा

रांची:-झारखंड में अब आदिवासी ‘देशद्रोही’ नहीं कहलायेगा. राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने इससे संबंधित एक संकल्प को मंजूरी दे दी है. दरअसल, पूर्व की बीजेपी सरकार ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) में संशोधन तथा पत्थलगड़ी आंदोलन के खिलाफ झारखंड के लगभग दस हज़ार आदिवासियों पर देशद्रोह समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था. आंदोलन में शामिल राज्य के हज़ारो आदिवासियों पर पूर्व की बीजेपी सरकार द्वारा अनेक धाराओं में झूठे मुकदमे लगाए गए थे. 29 दिसंबर, 2019 को हेमंत सोरेन सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में इन हज़ारो आदिवासियों से देशद्रोह समेत अन्य धाराओं में दर्ज केस वापस लेने का निर्णय लिया था. शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे संबंधित संकल्प को मंजूरी दे दी. इसके तहत सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के विरोध और पत्थलगड़ी आंदोलन में शामिल आदिवासियों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जायेंगे. उन सभी दर्ज कांडो के प्रत्याहरण से संबंधित संकल्प के प्रारूप को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वीकृति दे दी. जिला स्तरीय समिति बनाई गई थी : पत्थलगड़ी को लेकर झारखंड के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने के सिलसिले में जिलों में त्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया था. इस समिति में अध्यक्ष के रूप में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी तथा सदस्य के रूप में पुलिस अधीक्षक और लोक अभियोजक को रखा गया था. इस सिलसिले में सरायकेला खरसावां, खूंटी, चाईबासा, दुमका और साहिबगंज से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम में संशोधन के विरोध करने तथा पत्थलगड़ी करने से संबंधित मुकदमों को वापस लेने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है. ज्ञात हो कि विभिन्न थानों में पत्थलगड़ी को लेकर 23 मुकदमे दर्ज है.

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