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जश्न – ए – ईद – मिलादुन्नबी पर हर्ष उल्लास के साथ निकला मोहम्मदी जुलूस।

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जश्न – ए – ईद – मिलादुन्नबी पर हर्ष उल्लास के साथ निकला मोहम्मदी जुलूस।

सरकार की आमद मरहबा, हुजूर की आमद मरहबा के लगे नारे।


दुनिया में शांति के दूत बनकर आए पैगंबर -ए- इस्लाम मोहम्मद साहब।

चंदवा – रविवार को पूरी अकीदत एवं हर्षउल्लास के साथ जश्न – ए – ईद मिलादुन्नबी मनाया गया. इस अवसर पर अहले सुन्नत गुलशने सैयदना मदरशा से मोहम्मदी जुलूस निकाला गया, इसमें शामिल लोग हुजूर की आमद मरहबा, सरकार की आमद मरहबा जैसे नारे लगा रहे थे, 

जुलूस का नेतृत्व हैदर अली, रसीद मियां, वासीद टेलर, कलीम टेलर संयुक्त रूप से कर रहे थे, मुस्लिम समुदाय के लोग अपने हाथों में इस्लामी झंडा लहरा रहे थे, जुलूस शुक्रबजार का भ्रमन कर वापस मदरशा पहुंचा, यहां ईद मिलादुन्नबी का आगाज  कुरआन की तिलावत से की, अपने तकरीर में हाफिज अकील हुसैन ने बताया कि 

पैगंबर – ए – इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब इस्लाम के आखिरी पैगंबर व शांति के दूत बनकर दुनिया में तशरीफ लाए, उन्होंने दुनिया में फैली तमाम बुराइयों को दूर करने व शांति का पैगाम देने का काम किया, इनकी जन्मदिवस के मौके पर इस्लाम धर्म के लोग बड़े ही अकीदत के साथ ईद मिलादुन्नबी मनाते हैं, 
इस अवसर पर महफिल -ए- मिलाद, फातिहा ख्वानी, मुशायरा, कुरआन ख्वानी की जाती है,

हाफिज शेर मोहम्मद ने अपने तकरीर में कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने बुराइयां दूर की, सभी को समान दर्जा दिलाया,
इस्लाम के संस्थापक मोहम्मद साहब का जन्म 12 तारीख, रबीउल अव्वल महीने के सुबह -ए- सादिक (सवेरे-सवेर) के समय 571 ईसवी मक्का में हुआ। इसी याद में रविउल अव्वल त्योहार मनाई जाती है,

मोहम्मद साहब दुनिया में आकर  शांति का पैगाम दिया, जिस समय वह तशरीफ लाए उस समय समाज में तमाम बुराइयां थी, जिसमें शराबखोरी, जुआखोरी, लूटमार, वेश्यावृत्ति, बच्चियों के पैदा होने पर जिंदा दफना देना आदि कई बुराइयां समाज में मौजूद थीं, उन्होंने इन तमाम बुराइयों को दूर करने का काम किया और समाज में सभी को एक समान का दर्जा दिया, बुजुर्गों व महिलाओं को इज्जत दिलाई, वहीं इस्लाम को अखलाख मुहब्बत व प्रेम की बुनियाद पर पूरी दुनिया में फैलाया व लोगों को शांति से जीवन बसर करने का संदेश दिया,
आज के दिन मुस्लिम समाज के सभी लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद मिलादुन्नबी की बधाई देते हैं और खुशियां मनाते हैं। साथ ही इस अवसर पर जुलूस निकाल कर मोहम्मद साहब के अमन -ओ – चैन व भाई चारगी का संदेश लोगों को देते हैं,
मोहम्मद साहब दुनिया में आखिरी पैगंबर हैं, इनके बाद क्यामत तक कोई नबी नहीं आने वाला, सभी को शांति व भाईचारगी के साथ रहने का संदेश दिया,  बच्चा, बुजुर्गों व महिलाओं को इज्जत बख्शी, उन्हीं के जन्मदिन पर पूरी दुनिया में मुस्लिम धर्मावलंबी खुशी का जश्न मनाते हैं,
आज मोहम्मद साहब के आदर्श को अमल कर समाज में प्रेम भाईचारा का वातावरण कायम रखने की जरूरत है, अंत में दुआ सलाम पढ़कर ईद मिलादुन्नबी का जुलूस संपन्न हो गया,
 मौके पर असगर खान, अयुब खान, हाजी अबास अंसारी, बाबर खान, सदीक अंसारी, क्यामुदीन मियां, असरफ टेलर, कलीम टेलर, सलीम टेलर, कलीम टेलर, सदाम खान, गोलु खान, नसरूदीन मियां, रिजवान मियां, सलीम मियां, सलाम अंसारी, सफीक मियां, सकील टेलर, सदुल खान, रिजवान अंसारी, पप्पु टेलर, रिंकु मियां, निकहत प्रवीन, सादिया प्रवीन, अंजुम आरा, सैना खातुन समेत बड़ी संख्या में मदरशा के बच्चे शामिल थे।

स्थानिय प्रशासन अकिदतमंदों से मिला।
पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी मोहन पांडे, अंचलाधिकारी मुमताज अंसारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी अरविंद कुमार ने क्षेत्र भ्रमन के पश्चात शुक्रबजार मुस्लिम नेताओं असगर खान, अयुब खान, बाबर खान, हाफिज शेर मोहम्मद, हाफिज अकील हुसैन, रसीद मियां, हैदर अली, असरफ टेलर, मो0 कलीम, सदाम खान, वासीद टेलर से मुलाकात की, ईद मिलादुन्नबी की त्योहार को लेकर जानकारी ली।

चंदवा शहर में जुलूस निकालने की अनुमति नहीं मिलने पर नाराज दिखे मुस्लिम समुदाय,
सामाजिक कार्यकर्ता अयुब खान, असगर खान ने कहा कि त्योहार पर जुलूस निकालने पर प्रतिबंध ब्रिटिस शासन में भी नहीं था, शांति प्रिय शहर चंदवा में जुलूस निकालने की अनुमति नहीं देना मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय है, चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था में भी जुलूस निकालने नहीं दी गई इससे मुस्लिम समाज हैरान है, उनमें नाराजगी और मायुसी है।

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