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छठी जेपीएससी परीक्षा के विरुद्ध लॉक डाउन का पालन करते हुए राज्यव्यापी निजी प्रदर्शन…

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छठी जेपीएससी परीक्षा के विरुद्ध लॉक डाउन का पालन करते हुए राज्यव्यापी निजी प्रदर्शन…

झारखंड : आज शाम 5 बजे झारखंड के सभी 24 ज़िलों में छठी जेपीएससी परीक्षा में हुए अनियिमित्ताओं के विरुद्ध छात्र छात्राओं द्वारा विरोध जताया गया।

छात्र छात्राओं ने लॉक डाउन को देखते हुए अपने अपने घरों , होस्टल , लॉज की बाल्कनी , दरवाज़े के बाहर , खाली सड़क , खुले मैदान में अकेले अथवा 5 से 6 साथियों समेत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्लेकार्ड के साथ 5 मिनट तक थाली , घंटी , मशाल और जेपीएससी का पुतला जलाकर प्रदर्शन किया।

छात्र छात्राओं के हाँथों में जो प्लेकार्ड था उसमें साफ साफ अक्षरों में लिखा हुआ था कि…

  1. 6th JPSC रद्द करो।
  2. छठी JPSC का अधियाचना वापस लो।
  3. ज्ञानेंद्र कुमार को बर्खास्त करो।
  4. We want error free JPSC
  5. झारखंडी छात्रों से धोखा क्यूँ
  6. JPSC छात्रों का भविष्य बर्बाद मत करो।

ज्ञात हो कि जब से छठी जेपीएससी का अन्तिम परिणाम आया है तबसे छात्रों में इसे लेकर आक्रोश है। पहले तो कट ऑफ़ मार्क्स को लेकर विवाद हुआ और अब दो नये मामले सामने आये हैं। इसकी मेन्स परीक्षा में पेपर 1 के क्वालिफाइंग होने एवं इस संबंध में प्रकाशित विज्ञापन में इस विषय में प्राप्त अंकों से हिन्दी एवं क्षेत्रीय भाषा के छात्रों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने देने के प्रावधान के बावजूद अन्तिम परिणाम में इसके अंकों को कुल प्राप्तांकों के लिये जोड़ा गया। दूसरा यह कि मेन्स परीक्षा में कई ऐसे अभ्यर्थियों को भी पास कर दिया गया है जिन्होने एक या एक से अधिक पेपर में न्यूनतम अहर्तांक प्राप्त नहीं किये हैं और उनमें से कई अन्तिम रुप से चयनित भी हो गये हैं।
इन सब से छात्रों में जेपीएससी एवं सरकार के खिलाफ काफी आक्रोश है। चूँकि अभी कोरोना संक्रमण के कारण पूरे राज्य में लॉकडाउन है इसलिए आज शाम को 5 बजे पूरे राज्य में इस परीक्षा का जोरदार विरोध किया गया।

इस संबंध में JPSC के सभी छात्रों का कहना है कि जेपीएससी कोरोना से भी खतरनाक वायरस है जिसने विगत 20 वर्षों में कितने छात्रों का भविष्य बर्बाद करके रख दिया है। भ्रष्टाचार अभी भी जारी है मतलब अबतक इसका ईलाज नहीं हुआ है इसलिए इसबार या तो जेपीएससी की पूरी प्रक्रिया ही रद्द की जाये अन्यथा यह सड़क से लेकर न्यायालय तक छात्रों द्वारा की जाने वाली आर पार की लडाई के लिये तैयार रहे। आज का यह विरोध अनूठा होने के साथ-साथ ऐतेहासिक भी था।

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