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खुशियां बांटना ही जीवन का अच्छा इंसानियत है- हेना कन

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खुशियां बांटना ही जीवन का अच्छा इंसानियत है- हेना कन

लातेहार सदर प्रखंड में लंदन निवासी ब्रिटेन निवासी हैन्ना कन. 9000 किलोमीटर चलकर के लातेहार में आए हैं ।इनका यात्रा वियतनाम थाईलैंड बर्मा इंडिया बांग्लादेश होते हुए लातेहार पहुंचे 9000 किलोमीटर की यात्रा सुरुवात 2019 से 1 साल से यात्रा में निकले हुए हैं।
इनका सोचना है कि इंसान को इंसान से प्यार होनी चाहिए. खुशियां बांटना ही मनुष्य का सबसे अच्छा कार्य हो सकता है। इनका कहना है कि महिला भी किसी से कमजोर नहीं है। महिला भी बहुत काम कर सकती है। इसलिए हम प्लेन से यात्रा नहीं करके साइकिल से यात्रा कर रहे हैं .।जगह-जगह जाकर के छोटे बड़े सभी जगह से लोगो से मिल सके और उनसे हम बात कर सके, इंसान को इंसानियत से बड़ा कोई चीज नहीं है।
इनसे पूछने के बाद इन्होंने बताएं कि लंदन में इंसानियत खतरे में है। इसलिए हम दूसरे देशों की यात्रा निकले हैं. कि इंसानियत इस धरती से समाप्त नही हो जाये। मैं सभी धर्म का अच्छाई को मानता हूं ।
ये पशु प्रेमी है उन्होंने बताया कि मैं पशु से संबंधित किसी प्रकार का आहार नहीं लेता हूं. ना मैं दूध लेता हूं .न मधु लेता हूं ।मैं इंसान द्वारा उत्पादन की गई अन्य ग्रहण करते हैं ।मैं मांसाहार नहीं खाता हूं ।लोगों को हम कहते हैं कि इंसान प्राकृतिक से प्रेम करें. प्राकृतिक को नष्ट नहीं करें। इनका व्यक्तिगत जीवन के बारे में पूछने के बाद इन्होंने बताएं कि मेरा दादा रविंद्र नाथ बनर्जी कोलकाता के थे और मेरा दादी लंदन की थी. हम लोग पूरा परिवार लंदन में ही रहते हैं ।1960 में मेरा दादी कोलकाता में रही है ।
इनके साथ कनसका पौदार रांची से चलकर के लातेहार आए. और इनका विदाई करके पुनः रांची चले गए ।इनसे पूछे की भाषा आपको से परेसानी होती होगी. उन्होंने कहा कि इंसान की भाषा सारा धरती में एक है ।भाषा हमारे लिए कही बाधक नही बना है। उन्होंने बताया कि वियतनाम वर्मा सहित हर देश बहुत ही अच्छे हैं प्राकृतिक से भरा पूरा है बांग्लादेश में वहां प्राकृतिक बहुत ही अच्छा है इंसान में थोड़ा कमी है. भारत कुछ और है. भारत में इंसानियत का जीता जागता उदाहरण है। यहां के लोग हमको कोई परेशान नहीं करते हैं। सब लोग सहयोग करते हैं ।
भारत इन बेस्ट आई लव यू इंडिया इन्होंने बताएं।. प्रतिदिन 100 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से करते हैं।

कल रात्रि में आश्रय देने वाला कोई नहीं थे. भटक रहे थे. प्रखंड विकास पदाधिकारी गणेश रजक जी पता चला कि उन्होंने सक्रिय हो करके इनको परिसदन में आश्रय दिलाएं । सेवा के लिए धर्मेंद्र जी को नियुक्त किये।

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