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कृषि बिल संसद में पारित करने के खिलाफ माकपा और किसान सभा ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया, सभा की।

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कृषि बिल संसद में पारित करने के खिलाफ माकपा और किसान सभा ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया, सभा की।

  • इंदिरा गांधी चौंक में किसान विरोधी कृषि बिल की प्रतियां जलाकर विरोध जताया।
  • केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी।
  • किसानों के लिए विनाशकारी है केंद्र की भाजपा सरकार का कृषि बिल : अयुब खान

चंदवा:- कृषि अध्यादेश संसद में पारित करने के खिलाफ अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति व वामदलों के देशव्यापी अह्वान पर माकपा और झारखंड राज्य किसान सभा ने चंदवा में संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया. इंदिरा गांधी चौंक पर कृषि बिल की प्रतियां जलाकर विरोध जताया, इस दौरान किसान विरोधी अध्यादेश वापस लो, खेती किसानी को कॉरपोरेट के हवाले करना बंद करो, किसान विरोधी मोदी सरकार होश में आओ आदि नारे पार्टी कार्यकर्ता लगा रहे थे. इसका नेतृत्व सीपीएम के जिला सचिव सुरेन्द्र सिंह, झाराकिस के जिला अध्यक्ष अयुब खान कर रहे थे, मोटरसाइकिल रैली रेलवे क्रॉसिंग से निकाली गई जो मुख्य शहर, मेन रोड होते हुए थाना, ब्लॉक कलोनी होता हुआ इंदिरा गांधी चौंक पहुंचा, यहां प्रदर्शन और सभा की गई

इस अवसर पर अंचल सचिव रसीद मियां की अध्यक्षता में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अयुब खान ने कहा कि केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार कोविड महामारी में भी मनमानी करते हुए देश के किसानों मजदूरों कर्मचारियों, और बेरोजगारों को तबाह करने का अपना जनविरोधी नीतियां जारी रखे हुए है, कड़े विरोध के बावजूद भी भाजपा की सरकार ने पूंजीपति घरानों को खुश करने के लिए सभी संसदीय परंपराओं को ताक पर रखकर जिस प्रकार से कृषि क्षेत्र में लाए गए किसान विरोधी तीन राष्ट्रीय कृषि अध्यादेशों को पारित कराया है. वह घोर निंदनीय है, उन्होंने कहा कि जीएसटी और नोटबंदी की बिल लाने के समय में भी कहा गया था कि इससे जनता को फायदा होगा, साल में दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने की बात कही.

कालाधन वापस लाकर देशवासियों के खाते में पंद्रह पंद्रह लाख भेजने का ढिंढोरा पीटा गया, एक सौ स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था लेकिन उन बिलों और वादों का क्या हश्र हुआ आज सबके सामने है,
जिला सचिव सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की इस अलोकतांत्रिक हरकत देश के संघीय ढांचे को ही कमजोर करेगा, सरकार का जनविरोधी व किसान विरोधी फैसला हमारे कृषि उत्पादन आधारित अर्थ व्यवस्था में पूंजीपति परस्त परिवर्तन करने के साथ – साथ कृषि उपज के व्यापार को बड़े जमींदारों व काॅरपोरेट गठबंधन के पक्ष में कर देगा, अंचल सचिव रसीद मियां ने कहा कि एक ओर किसानों को तबाह करने के लिए कृषि बिल लाया गया है ,

इस अध्यादेश से धीरे – धीरे खेती किसानी खत्म हो जाएगी, निजी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा,
यह विधेयक किसानों के हित में हैं तो एनडीए के सबसे पुराने साथी और केंद्र सरकार मे शामिल अकाली दल के केंन्द्रीय मंत्री ने अपने पद से क्यों त्याग पत्र दे दिया है, यह बिल सिर्फ अंबानी – अडानी जैसे व्यापारियों को लाभ देने के लिए लाया गया है,


कहा कि इस कानून में कोई भी किसान कहीं भी और किसी को भी अपनी फसल तो बेच सकता है लेकिन इसमें एम.एस.पी दिलवाने की गारंटी नहीं है, एम.एस.पी (न्युनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी नहीं होने के ही कारण किसानों में रोष है,
जो भी धान गेहूं आदि फसल का एम.एस.पी दर तय है वही व्यवस्था निजी कंपनियों के लिए भी होनी चाहिेए थी जो नहीं है, एक साल निजी कंपनियां अच्छे दामों में फसल खरीदेंगी, उसके बाद कॉर्पोरेट कंपनियां मनमाने दामों पर फसल की खरीद करेंगी,


सरकार अगर किसानों की हितैषी है तो वह किसानों से सीधे फसल लेकर निजी कंपनियों को बेचे,आज अन्नदाता किसानों की हालत किसी से छिपी हुई नहीं है वे बेहद मुश्किल परिस्थितियों में खेती करते हैं और फिर उनको सही मूल्य भी नहीं मिल पाता है, कहा जा रहा है कि किसानों को एमएसपी से ज्यादा दाम मिलेंगे. तो फिर इसे सरकार कानूनी रूप क्यों नहीं पहना देती, मंडियों में तथा सरकार के हर सिस्टम में खामियां है इसे दुर करने के बजाय मंडियों और सिस्टम को खत्म करना सरकार की किसान विरोधी मंशा उजागर होती है,

मौके पर बैजनाथ ठाकुर, बीनोद उरांव, नंदलाल ठाकुर, द्वारीका ठाकुर, साजीद खान, मो0 इजहार खान, तिरीभूवन गंझु, सनीफ मियां, शिवा कुमार, जितन गंझु, गोपी गंझु, राहुल कुमार, तबरेज खान, गुलेमान खान, परवेज खान, असरफुल खान, संजीत नायक, मुन्ना गंझु, ननकु मियां, रामबृछ गंझु समेत कई लोग शामिल थे।

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