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आदिवासी और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के वास्ते हर साल झारखण्ड में चित्रकारी शिविर का आयोजन किया जाएगा

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आदिवासी और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के वास्ते हर साल झारखण्ड में चित्रकारी शिविर का आयोजन किया जाएगा

इस से देश के विभिन्न क्षेत्रों की देशज कलाओं एवं चित्र शैलियों के कलाकार एक दूसरे की कलाओं के परम्पराओं तथा मिथकों से परिचित होगें वे आज नेतरहाट के शैले हाउस में दिनांक 10 फरवरी 2020 से 15 फरवरी 2020 तक आयोजित ”आदिवासी एवं लोक चित्रकारो के प्रथम राष्ट्रीय शिविर के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होने कहा कि सभी विशिष्ठ परम्परा एवं जीवन शैली अपनी पारम्परिक कलाओं के माध्यम से अपने आप को प्रस्तुत करती है ।

देश के 16 राज्यों के चित्रकार इस शिविर आ कर एक दूसरे की विशेषताओं से अवगत हुए और उनके बीच सृजानात्मकता का आदान प्रदान भी हुआ इस दिष्टकोण से यह शिविर एतिहासिक है।

उन्होने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नेतरहाट की पूर्व से ख्याति रही है।

यहां वन -प्रांतर में पहाडों के उपर की नीरवता और शान्तिपूर्ण वातावरण में 16 राज्यों के कलाकारों को आपस में गंभीर विमर्श करने का अवसर मिला ।

इस शिविर से चित्रकारों को निसंदेह उचित पलेटफॉम मिला है।

मै आगन्तुक कलाकारों के प्रति आभार और जोहार व्यक्त करता हूँ।

सचिव अनूसूचित जाति/जनजाति एवं पिछडा वर्ग कल्याण विभाग श्रीमती हिमानी पांडेय ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा विगत दिनों डॉ0 रामदयाल मुण्डा अनुसूचित जनजाति कल्याण शोध संस्थान के तत्वाधान में आदिवासी दर्शन एवं आदि दर्शन पर गम्भीर विमर्श आयोजित किया गया था

उसी कडी में चित्रकला के माध्यम से विभिन्न राज्यों के लोक दर्शन की अभिव्यक्ति पर गम्भीर विमर्श के उदेश्य से एक सप्ताह के आदिवासी एवं लोक चित्रकारों के प्रथम राष्ट्रीय शिविर का आयोजन पहाडो की रानी नेतरहाट में किया गया।

इसका उदेश्य मनुष्य की सबसे अच्छी सोच और सुन्दर कलात्मकता की नेटवर्किंग करनी है।

कलाकार देश के अन्य क्षेत्रों की आदिवासी तथा लोक कलाओें से अपरिचित रहे हैं। इस शिविर नें कलाकारों को बेहतर ढंग से एक दुसरे जुडने तथा रचनात्मक संवाद करने का अवसर दिया है।

नेतरहाट विद्यालय की कला शिक्षा की उन्होने प्रशंसा करते हुए कहा कि नेतरहाट विद्यालय के विद्यार्थियों को इस शिविर के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओे से परिचित होने का मौका मिला है।

निदेशक डॉ0 रामदयाल मुण्डा अनुसूचित जनजाति कल्याण शोध संथान,श्री रणेन्द्र कुमार ने कहा की बडे कलाकारों को आपस में सम्वाद करने तथा अपनी कला की मार्केटिंग का अवसर प्रदान करने वाली कई कला दीर्घाएं मौजुद है परंतु लोक चित्रकला के कलाकार एक दुसरे के सम्पर्क में नहीं रह पाते हैं, और जिसकी वजह से वे अपनी कला को विस्तार नहीं दे पाते है।

इस लिए देशज चित्रकला के कलाकारों के आपस में समनवय तथा उनकी कला के संवर्धन के लिए इस शिविर का आयोजन किया गया।

अनूसूचित जाति/जनजाति एवं पिछडा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री श्री चम्पई सोरेन ने चित्रकारी शिविर में शामिल चित्रकारों की पेटिंग का अवलोकन किया तथा उनकी हौसला अफजाई की, साथ ही उन्होने चित्रकारों को नेतहरहाट आकर इस शिविर में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया।

आदिवासी और लोक चित्रकारों के प्रथम राष्ट्रीष्य शिविर के समापन समारोह मे विधायक मनिका विधानसभा क्षेत्र श्री रामचन्द्र सिंह, आयुक्त पलामू प्रमण्डल श्री विनोद कुमार, उपायुक्त लातेहार श्री जिशान कमर, पूर्व कुलपति राँची विश्वविद्यालय श्री के0के0नाग तथा उप निदेशक डॉ0 रामदयाल मुण्डा अनुसूचित जनजाति कल्याण शोध संस्थान श्री चिन्टू दोराईबुरू, उपस्थित थे।

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