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असिस्टेंट प्रोफेसरों ने मांगी भिक्षा

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असिस्टेंट प्रोफेसरों ने मांगी भिक्षा

रांची विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा विभाग के अट्ठारह अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों को पिछले 13 महीनों से उनके मेहनताना का भुगतान नहीं हुआ है। आपने चरणबद्ध आंदोलन के तहत इन असिस्टेंट प्रोफेसरों ने भिक्षाटान कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।

अपने हाथों में कटोरा लिए यह वह भाग्यशाली शिक्षक है जो रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन और जनजातीय भाषा विभाग के लापरवाही की वजह से इन शिक्षकों को पिछले 13 महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है इसी आक्रोश में भिक्षाटन कर अपनी पीड़ा व्यक्त की । आपको बताते दें कि यह आंदोलनरत शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाने के बाद अपना आंदोलन चलाया है

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में पढ़ाने वाले ये सहायक अध्यापक विभाग के अनुमति का अनुपालन करते हुए प्रतिदिन क्लास लिया करते थे लेकिन इन्हें यह पता नहीं था इनका भुगतान विश्वविद्यालय नहीं करेगी इनके बकाया राशि मानव संसाधन विभाग ने विश्वविद्यालय को भेज दिया है इसके बावजूद इनके साथ विश्वविद्यालय का सौतेला रवैया क्यों है।

गौरतलब है कि रांची विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है इसको देखते हुए अनुबंध पर इन शिक्षकों की नियुक्ति की गई है इन्हें घंटी आधारित शिक्षक भी कहा जाता है अब देखना यह होगा इनके आंदोलन का कितना असर विश्वविद्यालय प्रशासन पर पड़ता है और इनके बकाए का भुगतान कब तक हो पाता है

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